नवाचारी “नयार पुनर्जीवन योजना” जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में एक प्रभावी और दूरदर्शी पहल के रूप में उभर रही है।

पौड़ी। जनपद पौड़ी गढ़वाल में नवाचारी “नयार पुनर्जीवन योजना” जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में एक प्रभावी और दूरदर्शी पहल के रूप में उभर रही है। जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में आयोजित जल स्रोत तथा नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण (सारा) की बैठक में ‘एक जिला, एक नदी’ अभियान के अंतर्गत पूर्वी एवं पश्चिमी नयार नदी के पुनर्जीवन हेतु तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा की गई तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि यह योजना नयार घाटी, जो जनपद की पेयजल, सिंचाई और ग्रामीण आजीविका की आधारशिला रही है, को पुनः समृद्ध और जीवनदायिनी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि उक्त योजना के अंतर्गत जलागम आधारित उपचार, कंटूर ट्रेंच, तालाब एवं चेकडैम निर्माण, जियोटैगिंग, माइक्रोप्लानिंग तथा डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाएंगे, जिससे जल स्रोतों का संरक्षण, भूजल स्तर में वृद्धि, मृदा अपरदन पर नियंत्रण तथा पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिलेगी। 

प्रस्तुतिकरण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण जियोटैग लोकेशन के आधार पर सुनिश्चित किया जाए, जिससे कार्यों की सटीकता, पारदर्शिता और गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आधार पर किए गए कार्य न केवल जल संचयन को बढ़ाएंगे, बल्कि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायक होंगे।

उन्होंने परियोजना के सफल संचालन के लिए एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने, विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने तथा अधिकारियों एवं कार्मिकों के क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही चरणबद्ध माइक्रोप्लान तैयार करते हुए कार्यों की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप जल स्तर का आकलन एवं मूल्यांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि भूजल स्तर में हो रहे सुधार का सटीक आकलन किया जा सके और समयबद्ध, प्रभावी तथा दीर्घकालिक परिणाम प्राप्त हो सकें।

जिलाधिकारी ने कहा कि यह योजना केवल नदी तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह जनपद के भविष्य को जल संकट से सुरक्षित करने का एक मजबूत आधार बनेगी। वैज्ञानिक तकनीक और सुनियोजित कार्यप्रणाली के माध्यम से नयार घाटी का पुनर्जीवन सुनिश्चित करते हुए इसे जल संरक्षण के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।

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