मोदी युग के विकास की असलियत बता रहे हैं पहाड़ों में बंद होते स्कूल, जानिए कितने स्कूलों में लटके ताले और कितनों में लटकने वाले हैं

कोटद्वार। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की कुनीतियों की वजह से पहाड़ों से रोज पलायन हो रहा है, भारी भरकम विकास योजनायें मैदानों में बर्बाद की जा रही हैं और पहाड़ लोनली आइलैंड बनता जा रहा है।

उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने कहा कि मोदी सरकार की कुनीतीयाँ पहाड़ को बर्बाद कर रही हैं मगर पहाड़वासियों को इसका अंदाज नहीं है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता एवम पर्यावरण सहयोगी सोनम वांगचुक का लद्दाख को बचाने के लिए किया जाता अनशन 17 वें दिन में पहुँच गया है, मगर मोदी सरकार ने एक बार भी इस विषय में संवाद स्थापित करने की कोशिश नहीं की। मुजीब नैथानी ने कहा कि सोनम वांगचुक को अहसास हो गया है कि वर्तमान मोदी सरकार उनके संसाधनों को बाहरी राज्यों के बड़े व्यापारियों को देने का मन बना चुकी है, और ऐसे में लद्दाख का उत्तराखण्ड की तरह दोहन किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि कि गढ़वाली और कुमाऊनी लोगों को अहसास ही नहीं है कि विकास के विज्ञापन में हजारों करोड़ रुपयों के खर्च के बाद भी 1671 स्कूलों में ताले लग चुके हैं और 3573 स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सौ से ज्यादा ऐसे विद्यालय हैं जहाँ छात्र संख्या मात्र एक है। ऐसे में संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सोचने की बात यह है कि 1671 विद्यालयों में हरिद्वार और उधामसिंह नगर के मात्र 45 विद्यालय हैं। 

मुजीब नैथानी ने कहा कि गढ़वाल जिले में 315 स्कूल बंद हो चुके हैं। अल्मोड़ा में 167, बागेश्वर में 53 , चमोली में 153, चंपावत में 55, देहरादून में 124 नैनीताल में 82, पिथौरागढ़ में 224, रुद्रप्रयाग में 53 , टिहरी में 268 और उत्तरकाशी में 122 स्कूलों में ताले लग चुके हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार है तालों वाले घोटालों की सरकार, इसको नहीं है गढ़वाल और कुमाऊं के विकास से कोई सरोकार।

 

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