कोटद्वार। उत्तराखण्ड विकास पार्टी के सचिव एडवोकेट जगदीश चन्द्र जोशी ने गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं को पहचान दिलाने के लिए आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की।
एड जगदीश चन्द्र जोशी ने कहा कि गढ़वाली और कुमाऊँनी भाषायें अपने आप में समृद्ध भाषायें हैं और पुराने समय में गढ़वाल कुमाऊँ की राज भाषायें रह चुकी हैं। पुराने समय में राज आज्ञा भी इन्हीं भाषाओं में जारी की जाती थीं।
उन्होंने कहा कि जैसे इंग्लिश, फ्रेंच,जर्मन, इटालियन, राशियन, पुर्तगीज आदि की लिपि रोमन है वैसे ही नेपाली, अवधी, भोजपुरी, हिंदी गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं की लिपि देवनागरी है, साथ ही साथ गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं की लिपि भी देवनागरी ही है।
शब्द और साहित्य परंपरा में दोनों भाषायें समृद्ध हैं और कई मामलों में तुलनात्मक रूप से हिंदी से भी अधिक समृद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि गढ़वाली भाषा में अ स्केच ऑन गढ़वाली ग्रामर विद अ फोकस ऑन ग्रामेटिकल जेंडर विषय में साकेत बहुगुणा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ फिलॉस्फी इन लिंग्वास्टिक की डिग्री हासिल की है।
