कोटद्वार। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। उत्तराखण्ड विकास पार्टी के सचिव एडवोकेट जगदीश चन्द्र जोशी ने कहा कि शहीदों के सपनों को पूरा करना समस्त उत्तराखण्ड के नागरिकों का दायित्व है।
एडवोकेट जगदीश चन्द्र जोशी ने कहा कि देश में अन्य भाषाओं के समृद्ध और सशक्त होने का एकमात्र कारण इन भाषाओं का आठवीं अनुसूची में शामिल होना है। उन्होंने कहा कि आठवीं अनुसूची में शामिल होने से भाषाओं को संवर्धन हेतु केंद्रीय और राज्य स्तरीय संरक्षण और खर्च प्राप्त होते हैं, जिससे भाषा के विकास के लिए न केवल सरकारी स्तर से कार्य होता है वरन भाषा रोजगार का माध्यम भी बनती है।
उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह ने उत्तर प्रदेश में उर्दू अनुवादकों के लिए सरकारी पदों की घोषणा की थी, और उत्तराखण्ड में भी आज भी उर्दू अनुवादक राजस्व कार्यालयों में रोजगार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आठवीं अनुसूची में शामिल होने से इसके जानने वालों को सरकारी रोजगार प्राप्त होने लगेगा इससे न केवल गढ़वाली कुमाऊँनी वरन अन्य लोग भी भाषा सीखने के लिए प्रेरित होंगे।
उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में आने वाले कल और बीत गए कल के लिए कोई अलग शब्दावली नहीं है जबकि गढ़वाली में भोल और ब्याली गढ़वाली भाषा के शब्द संसार की समृद्धता का परिचय करा देते हैं। गढ़वाली भाषा की नौ बोलियाँ हैं जिनमें श्रीनगरिया, टिरियाली, नागपुरी और सलाणी प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि यूएन ने गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं को आने वाले 50 सालों में लुप्तप्राय होने वाली भाषाओं की श्रेणी में रखा है। उन्होंने कहा कि खेदजनक बात है कि गढ़वाली कुमाऊँनी समाज देश के अन्य कई समाजों से आर्थिक और बौद्धिक रूप से सम्पन्न होने के बावजूद अपनी मातृ भाषा के संवर्धन करने की कोई कोशिश नहीं कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल न करके राज्य शहीदों के सपनों का अपमान कर रही है।