देहरादून। सूचना आयोग ने जिलाधिकारी गढ़वाल की लापरवाही पर सख्त रुख दिखाते हुए जिलाधिकारी गढ़वाल के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
मामले की शुरुआत कोटद्वार के उपजिलाधिकारी के एक रिलीज ऑर्डर से हुई जिसमें उन्होंने 02 अगस्त 2019 की रात को साढ़े ग्यारह बजे सीज किए गए डंपरों को 03 अगस्त को सुबह यह लिख कर छोड़ दिया कि कागजों की जाँच में उनके रवन्ने वैध पाए गए।
शिकायतकर्ता मुजीब नैथानी द्वारा उक्त डंपरों के उक्त रवन्नो की प्रमाणित कॉपी की मांग की गई जिसके आधार पर डंपरों के साथ लगे रवन्नों को सही पाया गया था। लोक सूचना अधिकारी द्वारा उन्हें 03 अगस्त को जारी किए गए रवन्नों की प्रति उपलब्ध कराई गई जिसपर उनके द्वारा अपील की गई थी।
मुख्य सूचना आयुक्त ने अपील को सही मानते हुए पाया कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा जिलाधिकारी को भ्रमित किया गया और जिलाधिकारी गढ़वाल को मामले की पुनः सुनवाई के आदेश दिए।
जिसके क्रम में जिलाधिकारी गढ़वाल को खान अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि 02 अगस्त 2018 की रात्रि को उक्त डंपरों के पास कोई वैध अधिगमन पत्र नहीं था। इसके बाद जिलाधिकारी द्वारा उक्त मामले का निस्तारण नहीं किया गया और आयोग को भ्रमित करने के उद्वेश्य से कह दिया गया कि खनन अधिकारी द्वारा आख्या उपलब्ध नहीं कराई गई।
जिसपर सूचना का अधिकार का उल्लंघन देखते हुए सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने जिलाधिकारी गढ़वाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया कि क्यों न उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु लोक प्राधिकारी को संस्तुति प्रेषित की जाय, साथ ही लोक सूचना अधिकारी को भी भ्रामक सूचना उपलब्ध कराने के लिए 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से पच्चीस हजार रुपयों तक की शास्ति का नोटिस जारी कर दिया है।
