उच्चतम न्यायालय की पीठ ने नीट पीजी में कट ऑफ मार्क घटाने को लेकर दायर जनहित याचिका में मोदी सरकार को किया नोटिस जारी

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने नीट – पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ प्रतिशत घटाने के निर्णय को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस पी. श्री नरसिंहा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को करेगी।

याचिका में 13 जनवरी को राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत क्वालिफाइंग कट-ऑफ को असामान्य रूप से कम—यहां तक कि शून्य और नकारात्मक प्रतिशताइल तक—घटा दिया गया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के मानकों में इस तरह की कटौती मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है। उनका तर्क है कि कट-ऑफ घटाने से रोगी सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सीटें भरने के उद्देश्य से लिया गया यह फैसला मेरिट को समाप्त कर देता है और प्रतियोगी परीक्षा को महज़ प्रशासनिक औपचारिकता बना देता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि चिकित्सा का क्षेत्र सीधे मानव जीवन, शारीरिक अखंडता और गरिमा से जुड़ा है, ऐसे में पेशेवर मानकों का संस्थागत रूप से पतन स्वीकार्य नहीं हो सकता। साथ ही, पोस्टग्रेजुएट स्तर पर मेरिट में यह गिरावट राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की वैधानिक मंशा के भी विपरीत बताई गई है।

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