कोटद्वार। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने गढ़वाली कुमाऊँनी संस्कृति बचाने के लिये उत्तराखण्ड में सख्त भू कानून बनाने की माँग की और कहा कि गैरसैंण को राजधानी न बनाया गया तो गढ़वाली कुमाऊँनी संस्कृति समाज और भाषा को लुप्त होते देर नहीं लगेगी
उत्तराखण्ड विकास पार्टी के सचिव एडवोकेट जगदीश चन्द्र जोशी ने कहा कि इन 25 सालों में उत्तराखण्ड की संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया उल्टा ही एक राष्ट्र एक कानून बना कर देश की अल्पसंख्यक संस्कृतियों को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
एडवोकेट जगदीश चन्द्र जोशी ने कहा कि 25 सालों में गैरसैंण में हजारों करोड़ के खर्च के बावजूद गैरसैंण को राजधानी बनाने से मोदी सरकार इसलिए डर रही है क्योंकि राजधानी गैरसैंण न केवल पहाड़ों में आर्थिक विकास की नई रेखा खींचेगा वरन गढ़वाली और कुमाऊँनी संस्कृति, समाज और भाषा को भी एक नया आधार प्रदान करेगा जो कि वर्तमान मोदी सरकार के एजेंडे के बिल्कुल विपरीत है।
एडवोकेट जगदीश चन्द्र जोशी ने कहा कि गढ़वाली और कुमाऊँनी यदि वाकई अपनी संस्कृति भाषा समाज बचाये और बनाये रखना चाहते हैं तो उन्हें सख्त और मजबूत होना पड़ेगा नहीं तो मोदी सरकार आने वाले सालों में गढ़वाली और कुमाऊँनी समाज, भाषा और संस्कृति को हिंदुत्व के नाम पर लील लेगी।
उन्होंने कहा कि हर राज्य की परिस्थितियाँ अलग होती हैं। उत्तराखण्ड राज्य औद्योगिक राज्य नहीं है औद्योगिकरण के नाम पर गढ़वाल और कुमाऊँ के साथ ठगी की जा रही है। नाम गिरामी कंपनियाँ मंहगी मंहगी जमीनें कौड़ियों के भाव में लेकर और केंद्र और राज्य की सब्सिडी खा कर बंद हो चुकी हैं। कामगार घर बैठने या नौकरी के लिए बाहरी राज्यों में पलायन करने को विवश हैं। एक तरह भूमि की बंदरबांट और दूसरी तरफ मूल निवासी खाली हाथ। उन्होंने कहा कि गढ़वाली और कुमाऊँनी समाज को मोदी सरकार की चालाकियाँ समझनी चाहिए नहीं तो देर हो जायेगी।