गढ़वाली और कुमाऊँनी को भाषा का दर्जा न देने पर उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने जताया रोष

ऋषिकेश। राज्य बनने के 25 सालों बाद तक गढ़वाली और कुमाऊँनी को भाषा का दर्जा न दिये जाने पर उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने गहरा रोष व्यक्त किया। उत्तराखण्ड विकास पार्टी के उपाध्यक्ष पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि भाजपा कांग्रेस के नेता आज जिन गढ़वाली कुमाऊँनी समाज की शहादत की वजह से मंत्री विधायक और मुख्यमंत्री बने, उस समाज का ही तिरस्कार कर रहे हैं।

पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा की मिलीभगत के कारण गढ़वाली और कुमाऊँनी को आज तक भाषा का दर्जा तक नहीं मिला, जबकि भाषा किसी भी राज्य की संस्कृति की झलक होती है और समाज के विकास और उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि हमारा किसी भी अन्य भाषा से कोई विद्वेष नहीं है, मगर अपने ही राज्य में उपेक्षित होने के बाद अन्य भाषाओं को राज्य की राज भाषा का दर्जा दिया जाना जले पर नमक छिड़कना है जो कि बर्दाश्त से बाहर है।

उन्होंने कहा कि पहले पंजाबी को राज्य की राज भाषा का दर्जा दिया गया, अब नेपाली को राज्य की राजभाषा का दर्जा देकर गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा को कमतर सिद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यही हाल था तो आने वाले समय में बंगाली को भी वोट बैंक की खातिर राजभाषा का दर्जा दे दिया जायेगा, गढ़वाली और कुमाऊँनी अपना वजूद बचाये रखने के लिए संघर्ष करती रहेंगी।

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