नैनीताल। उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग से जुड़ी दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी की बैठक नहीं करने पर गहरी नाराजगी जताई।
खंडपीठ ने मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार कोर्ट से बार-बार समय की मांग करती आ रही है, ऐसे में अब सरकार से 24 घंटे के भीतर इस पर अपना जवाब पेश करें।
कोर्ट ने पूछा है कि अभी तक पूर्व के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ? जवाब पेश नहीं करने पर संबंधित सचिव 15 मई को 11 बजे कोर्ट में पेश होंगे। आज यानी 13 मई को हुई सुनवाई पर कोर्ट ने सरकार से पूछा कि पूर्व के आदेश का अनुपालन हुआ या नहीं? जिस पर सरकार ने कोर्ट से और समय देने की मांग की। कोर्ट ने बार-बार समय की मांग करने पर नाराजगी व्यक्त की।
पिछली सुनवाई के दौरान को कोर्ट ने सरकार से कहा था कि 3 अप्रैल को जो सर्च कमेटी की बैठक होनी है। उस बैठक में लिए गए निर्णय को शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करें, लेकिन 3 अप्रैल को सर्च कमेटी का कोरम पूरा नहीं होने के कारण उसकी बैठक नहीं हो पाई, जिस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 हफ्ते बाद की तिथि रखी थी।
इससे पहले की तिथि पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए कोर्ट से 6 महीने का समय मांगा गया था, लेकिन कोर्ट ने 3 महीने का समय देते हुए लोकायुक्त को नियुक्त करने को कहा था। एक साल बीत जाने के बात भी अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
आज तक सर्च कमेटी की बैठक तक नहीं हो पाई. जबकि, इनकी नियुक्ति करने के लिए साल 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि एक साल पहले भी सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए समय मांगा गया था। अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हो पाई, अब और समय मांगा जा रहा है।
गौर मतलब है कि लोकायुक्त की नियुक्ति हेतु सुमन बडोनी और परमानंद बलोदी कई बार अनशन पर बैठ चुके हैं।