पौड़ी। गढ़वाल जिले में लगातार हो रहे पलायन का असर सरकारी स्कूलों पर साफ दिखाई देने लगा है। इस वित्तीय वर्ष विभिन्न विकासखंडों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्र संख्या शून्य होने के कारण जिले के 40 स्कूलों में ताले लटक गए हैं। इनमें प्राथमिक के 32 और उच्च प्राथमिक के 8 विद्यालय शामिल हैं।
अमर उजाला के मुकेश चंद्र आर्य के मुताबिक शिक्षा विभाग के मुताबिक जिले में संचालित 1297 प्राथमिक विद्यालयों में से 32 ऐसे हैं जहां नए शैक्षणिक सत्र में एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया जबकि 231 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आठ विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य दर्ज की गई शून्य छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद करने की प्रक्रिया छात्र संख्या शून्य होने के आधार पर ही की जा रही है।
प्राथमिक विद्यालयों में सबसे ज्यादा पांच स्कूल बीरोंखाल ब्लॉक में बंद हुए। जबकि पौड़ी व यमकेश्वर में चार- चार और एकेश्वर, द्वारीखाल, कोट, कल्जीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पोखड़ा, दुगड्डा में दो-दो और खिर्स, जयहरीखाल व नैनीडांडा में एक – एक स्कूल बंद हुए। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर एकेश्वर, यमकेश्वर, कल्जीखाल रिखणीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी और जयहरीखाल विकासखंडों में एक -एक स्कूल बंद हुए।
किस ब्लॉक में कौन स्कूल हुए बंद
एकेश्वर ब्लॉक में प्रावि डियूल्ड, प्रावि पुसोली, उप्रावि चौड़खाल, यमकेश्वर में प्रावि पलेलगांव, प्रावि पैंया, प्रावि उमड़ा, प्रावि नांद, उप्रावि चोपड़ा कस्याली, द्वारीखाल में प्रावि घंडालू व प्रावि खेड़ा, वीरोंखाल में प्रावि तनकिला, प्रावि गाडखर्क, रतकोट, सुंदरखाल व चौंडी स्कूल शामिल हैं। कोट में प्रावि सैंज व कंडोला, कल्जीखाल में प्रावि बूंगा-दो, प्रावि बलोद व उप्रावि पलाई, खिसू में प्रावि मुसोली, थलीसैंण में प्रावि खरकासारी, कुवाखर्क व उप्रावि कांडई बंद हुए। रिखणीखाल में उप्रावि मेलधार, पावी में प्रावि कोटा, कलुण, व उप्रावि कुई पोखड़ा में प्रावि चमनाऊ व प्रावि पोखड़ा शामिल हैं। पौड़ी ब्लॉक में प्रावि गजेंद्रपुर, प्रावि चांदखेत, प्रावि डोवल्या, प्रावि थपलियालगांव और उप्रावि कड़ाकोट, दुगड्डा में प्रावि गढ़सिर और प्रावि केष्टा, जयहरीखाल में प्रावि मोली और उप्रावि रैतपुर और नैनीडांडा में प्रावि झुडंगू बंद हो गया है।
उत्तराखंड विकास पार्टी के उपाध्यक्ष पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि ही पलायन कर रहे हैं तब दोष किसको दिया जाय। उन्होंने पलायन रोकने के लिये राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग की।
