मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों का सकारात्मक प्रभाव जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में भी दिखने लगा है

पौड़ी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर दूरस्थ क्षेत्रों में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया द्वारा किए जा रहे लगातार भ्रमण, जनचौपालों और स्थलीय निरीक्षणों का सकारात्मक प्रभाव अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों द्वारा उठाई गई समस्याओं पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पेयजल, सड़क, जल निकासी, विद्युत एवं गैस जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई मामलों का समाधान किया है, जबकि शेष प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण कराया जा रहा है।
शंकरपुर स्थित राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज में पेयजल कनेक्शन कटने से उत्पन्न समस्या का जिलाधिकारी के निर्देशों पर समाधान करते हुए जलापूर्ति बहाल कर दी गई है तथा आवश्यक मरम्मत कार्य भी पूरा किया गया है। शंकरपुर-गौला बखरोटी-कमेडा बसेड़ी मोटर मार्ग पर समलीकरण कार्य शुरू कर यातायात व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। वहीं विद्युत व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के समाधान हेतु पोल एवं लाइन बदलने की कार्रवाई भी की जा रही है।
मैंदणी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन की मरम्मत कर जलापूर्ति सुचारु की गई है। हर घर नल-घर जल योजना के लंबित कार्य पूरे कर कई परिवारों तक पेयजल पहुंचाया गया है तथा रेवा पंपिंग योजना की बाधित जलापूर्ति भी बहाल कर दी गई है।
संगलिया क्षेत्र में जनचौपाल में प्राप्त शिकायत के बाद जडाऊखांद में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नालियों एवं स्कपरों की सफाई तथा कच्ची नाली निर्माण कार्य पूरा किया गया है, जिससे बरसात में जल निकासी व्यवस्था बेहतर हुई है। नैनीडांडा क्षेत्र में जल निगम के अवर अभियंता को नियमित रूप से क्षेत्र में उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मैंदणी और संगलिया क्षेत्र में ओपन जिम की मांग पर स्वीकृति की प्रक्रिया प्रगति पर है।
मुस्याखांद क्षेत्र में हर घर नल योजना के अधूरे कार्य पूरे कराए जा रहे हैं तथा थवाड़ा-चैवाड़ा पंपिंग योजना की जलापूर्ति सुचारु करने के लिए लीकेज दूर किए जा रहे हैं। भौन क्षेत्र में गैस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संबंधित गैस एजेंसी को उपकार्यालय खोलने के निर्देश दिए गए थे, जिसके तहत आगामी एक सप्ताह में उपकार्यालय का संचालन शुरू हो जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनचौपाल केवल शिकायत दर्ज कराने का माध्यम नहीं, बल्कि उनके त्वरित समाधान का प्रभावी मंच हैं। प्रत्येक शिकायत की नियमित निगरानी की जा रही है और अधिकारियों को फील्ड में जाकर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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