इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि थाने का एसएचओ जो जनरल डायरी एंट्री नहीं कर सकता, उसको पुलिस की नौकरी से निकाल देना चाहिए। वह आरक्षी/सिपाही बनने लायक भी नहीं है।
देवरिया के गौरी बाजार थाने से जुड़े एक मामले में चार लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने थाने की सीसीटीवी फुटेज मांगी, लेकिन पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी सिस्टम खराब था।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर सीसीटीवी खराब था तो इसकी जानकारी जनरल डायरी में दर्ज क्यों नहीं की गई।
सुनवाई में पुलिस अधिकारियों के जवाबों से नाराज कोर्ट ने कड़ी टिप्पणियां करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने संबंधित एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी पुलिस कप्तान से जवाब मांगा और कहा कि ऐसा एसएचओ पद पर रहने के योग्य नहीं है।
कप्तान ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि माफी लोगों से मांगी जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने चारों याचिकाकर्ताओं को कुल ₹65,000 मुआवजा देने का आदेश दिया।
यह रकम संबंधित एसएचओ की सैलरी से वसूल की जाएगी; हालांकि एसएचओ को बर्खास्त करने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया।