कोटद्वार। कोटद्वार नागरिक मंच ने मोदी डबल ट्रिपल इंजन सरकार के दुबारा निर्वाचित हो जाने के बाद भी जनसमस्याओं का हल न हो पाने से गहरी नाराजगी जताई। कोटद्वार नागरिक मंच की नियमित मासिक बैठक में मंच के सभी सदस्यों ने एक मत होकर स्वीकार किया कि मोदी डबल ट्रिपल इंजन सरकार में जनहित के मुद्दों पर कार्य करने की बजाय सरकार अपने मुद्दे जनता पर थोप रही है जिसकी परिणीति नगर निगम, जिला विकास प्राधिकरण और अब महायोजना के रूप में सामने आई है।
कोटद्वार नागरिक मंच के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश नैथानी ने कहा कि मंच के ज्यादातर सदस्य भारतीय जनता पार्टी को ही वोट देते आये हैं, मगर अफसोस है कि जनप्रतिनिधियों को कोटद्वार की समस्याओं के निराकरण के लिए बार बार ध्यान आकृष्ट कराने के बावजूद समस्याओं का हल नहीं हो रहा है।

देवव्रत काला ने कहा कि मोटर नगर प्रकरण में निगम के अधिकारियों द्वारा सही अपील न किये जाने से कॉमर्शियल कोर्ट में नगर निगम मुकदमा हार गया है। उन्होंने कहा कि नॉर्थ कॉर्बेट रिजॉर्ट की हालत पर किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा कोई पहल न किया जाना बताता है कि जनप्रतिनिधियों के असली एजेंडे कोटद्वार का विकास नहीं है।
गोविंद डंडरियाल ने कहा कि सरकार को जगाने के लिए और कोटद्वार के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जायेगा और कहा कि इसके लिए वे आमरण अनशन करने को भी तैयार हैं।
मंच के महा सचिव अतुल भट्ट ने कहा कि नगर आयुक्त से कोटद्वार की समस्याओं पर चर्चा करने जब मंच के सदस्य पहुँचे तो नगर आयुक्त द्वारा निराकरण का आश्वासन तक नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि कोटद्वार में वेंडिंग पॉलिसी लागू हो जाने के बाद बदरीनाथ मार्ग और गोखले मार्ग पर रेड़ी ठेली लगाना प्रतिबंधित है और नगर आयुक्त गोखले मार्ग पर रेड़ी ठेली वालों के लिए सड़क पर निशान लगवा रहे हैं जो कि अवैध है। गोखले मार्ग बदरीनाथ मार्ग और 62 बीघा का अतिक्रमण हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हटा रहे हैं, जो बताता है कि नगर आयुक्त कानून और संविधान और नगर निगम एक्ट का अनुपालन नहीं कर रहे हैं।
अनूप थपलियाल ने कहा कि निगम बोर्ड की बैठक प्रत्येक दो माह में होनी चाहिए ये नियम है मगर नगर आयुक्त साल में दो बैठक करवा रहे हैं साथ ही विकास समितियों का गठन ना कर कानून की अवहेलना कर रहे हैं।उन्होंने अफसोस जताया कि निगम पार्षदों को नियमों का ज्ञान नहीं है इसलिए नगर आयुक्त निगम बोर्ड में मनमानी कर रहे हैं, जिससे प्रतीत होता है कि उन्हें नियमानुसार कार्य करने की इच्छा नहीं है और अतिक्रमणकारियों से ज्यादा स्नेह है।

राजेंद्र प्रसाद पंत ने कहा कि उत्तराखण्ड में नगर निगम जबरदस्ती थोपे गये हैं, जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में भी मात्र 17 नगर निगम हैं मगर सवा करोड़ की जनसंख्या वाले उत्तराखण्ड में 11 नगर निगम बनाये गये हैं जो बताता की भूमि कानून को कमजोर करने के लिए नगर निगमों का गठन किया जा रहा है जो भविष्य में मूल निवासियों के लिए चिंता का सबब होगा। उन्होंने ऋषिकेश में जंगलात की लीज की भूमि को उक्त भूमि पर बसे गढ़वालियों को लीज पर देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के भ्रष्टाचार की सजा जनता को नहीं मिलनी चाहिए।
बैठक में हर्षवर्धन ध्यानी, शंकर दत्त गौड़, केसी राम निराला, राजेंद्र प्रसाद पंत, देवव्रत काला, मुजीब नैथानी,जनार्दन प्रसाद ध्यानी, सूर्य नारायण पाण्डेय, रमेश सिंह नेगी, सुरेश चंद्र मधवाल , सुनील कुमार कोटनाला, भारत मोहन काला, एस एन नौटियाल, विनय माहेश्वरी और इंद्रमणि देवरानी आदि मौजूद थे।