सहारनपुर। एनआईए ने पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट से बरामद 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट के मामले में फरार आरोपित एक बैंक अधिकारी अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। दो फरार हैं। तीन बैंक अधिकारियों के खिलाफ 29 अगस्त को सदर बाजार थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
तीन सितंबर को एनआइए ने मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए करेंसी चेस्ट को अपने कब्जे में लिया था। करेंसी चेस्ट से पांच अगस्त को 111 करोड़ रुपये आरबीआइ जयपुर भेजे गए थे। इनमें गले, कटे व अन्य नोट थे। वहां गिनती होने के बाद इनमें चार लाख 30 हजार 900 रुपये कम मिले थे।
इसकी जांच शुरू हुई तो शुरुआती गिनती में सात करोड़ 40 लाख रुपये नकली, इसके बाद यह संख्या 17 करोड़ 29 लाख पहुंच तक पहुंची। पीएनबी के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील कुमार व अमित कुमार के खिलाफ सदर बाजार थाने में मुकदमा दर्ज कराकर निलंबित कर दिया गया था। कुछ दिन पहले ही अमित कुमार का सहारनपुर से जगाधरी ट्रांसफर किया गया था।
मामला सामने आने के बाद से ही तीनों अधिकारी फरार चल रहे थे। अब एनआइए ने अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। एनआइए नकली नोटों की साजिश के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। फरार दो अन्य आरोपितों की भी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।
उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने सवाल उठाये कि पूरे देश को जिस नकली नोट को बंद करने के लिए नोटबंदी की आग में झोंका न उस समय नकली नोटों का कोई पता चला न कोई काला धन सरकार की पकड़ में आया और अब नये नोटों की क्वालिटी और समानता इतनी खराब है कि अलग अलग बैच के असली नोट भी रंग रूप और साइज में अलग अलग होने के कारण नकली दिखते हैं और इसी का फायदा पाकिस्तान उठाता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि नकली नोटों से बचने के लिए पुराने नोटों जैसी अच्छी कागजी सामग्री, इंक और समान साइज आदि का प्रयोग करना चाहिये।
उन्होंने कहा कि जिस किसी ने भी इन नोटों की संरचना को मंजूरी दी उसकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध है।