यूरोप के कई देशों में बढ़ती मंहगाई, घटती जीडीपी बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन, फ्रांस में हिंसा और आगजनी तक पहुंचा

पेरिस। प्रदर्शनों की दूसरी रात रविवार को पेरिस और मार्सेई में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक इलाके में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने साइकिलों के ढेर में आग लगा दी। पुलिस ने कई जगह दुकानों में लूटपाट रोकने के लिए कार्रवाई की। शनिवार को हुए प्रदर्शनों में महंगे सामान बेचने वाली दुकानों और सुपरमार्केट को भी निशाना बनाया गया। हिंसा के बाद कई शहरों में सफाई और नुक्सान की मरम्मत का काम शुरू किया गया।

मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में आग लगने से ऐतिहासिक टाउन हॉल को भारी नुकसान पहुंचा है। आग की वजह से इमारत का क्लॉक टावर ढह गया। शहर के मेयर गिलौम गेरां ने कहा कि इमारत को जानबूझकर निशाना बनाया गया।

वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों ने मैक्रों से प्रदर्शन कर रहे हाईस्कूल के छात्रों की मांगों पर ध्यान देने को कहा। अर्थव्यवस्था मंत्री रोलां लेस्क्योर ने हिंसा से प्रभावित कारोबारियों को सरकारी मदद देने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा और उनसे भरपाई भी कराई जाएगी।

देश के कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई। हालात को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को देश के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने हिंसा पर गुस्सा जताया और कहा कि इसे किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता।

फ्रांस में इन प्रदर्शनों के दौरान करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि प्रोटेस्ट के दौरान करीब 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। शनिवार को देशभर के कई शहरों में पांच लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे थे। इनमें ज्यादातर लोग शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की, पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाया और सरकारी इमारतों में आग लगा दी।

मैक्रों ने माना कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों की कुछ मांगें जायज हैं। महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोगों में नाराजगी है। लेकिन उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की मांगों को हिंसा करने वालों की हरकतों से जोड़कर नहीं देखना चाहिये। मैक्रों ने देश में एमरजेंसी लगाने का ऐलान नहीं किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन को कुछ प्रदर्शनों पर रोक लगाने का अधिकार दिया जाएगा। इसका मकसद सरकारी इमारतों, दुकानों और कारोबार को नुकसान से बचाना है।

उधर इटली समेत यूरोप के अन्य देशों में भी प्रदर्शन हुये। बढ़ती मंगाई, घटती जीडीपी और युवाओं की बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हुये।

 

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