सूचना उपलब्ध न कराने पर सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर सख्त, चार उपजिलाधिकारियों को जारी किया कारण बताओ नोटिस

देहरादून। सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेशों के अनुपालन में जिलाधिकारी गढ़वाल के विभिन्न आदेशों  व उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के आदेशों के साथ साथ खुद लोक सूचना अधिकारियों के द्वारा जारी आदेशों के अनुपालन न हो पाने पर सूचनार्थी को गलत सूचना दिये जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस और लोक प्राधिकारी को क्षतिपूर्ति  दिलवाने का नोटिस जारी किया है।

विदित हो कि जिला प्राधिकरण में स्वैच्छिक मानचित्र स्वीकृति के संबंध में दायर जनहित याचिका में जिला विकास प्राधिकरण और नगर निगम कोटद्वार को अपने अपने क्षेत्राधिकार में अवैध निर्माण न होने देने के आदेश दिये गये थे, चूंकि प्राधिकरण के आस्तित्व में आने के बाद नगर निगम का नक्शा स्वीकृत करने का क्षेत्राधिकार खत्म हो गया था, अतः मामले में अवैध निर्माण पर कार्यवाही प्राधिकरण को करनी थी, जिस संबंध में समय समय पर आदेश भी जारी किये गये थे और बाकायदा  अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस भी दिये गए थे। 

मामले में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अधिकारियों द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ किए गए आदेशों के क्रम में कितने अवैध निर्माणों पर प्राधिकरण ने कार्यवाही की इस संबंध में मुजीब नैथानी द्वारा सूचना मांगने पर लोक सूचना अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि शासन द्वारा मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को स्वैच्छिक कर दिया गया है, जिस वजह से अवैध निर्माण पर कोई कार्यवाही किया जाना धारित नहीं है।

मामला उत्तराखण्ड सूचना आयोग में आने पर सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय का आदेश और उसके क्रम में नगर एवं शहरी विकास प्राधिकरण के साथ साथ जिलाधिकारी गढ़वाल, अपर जिलाधिकारी गढ़वाल और संयुक्त सचिव जिला विकास प्राधिकरण द्वारा कार्यवाही कर आख्या उपलब्ध कराने के कई आदेश किये गये, मगर न तो अवैध निर्माण  पर कोई कार्यवाही की गई और ना ही आख्या उपलब्ध कराई गई।

आयोग ने पाया कि समस्त आदेशों में कार्यवाही कर आख्या उपलब्ध कराने के आदेश हैं पर लोक सूचना अधिकारी उक्त आदेशों के क्रम में सूचना उपलब्ध कराने की बजाय शासन के स्थगनादेश को आधार बनाते हुए सही सूचना उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और ऐसे में अवैध निर्माण के संबंध में जारी किये गए नोटिस के संबंध में स्पष्टीकरण भी नहीं दे पा रहे हैं। 

आयोग ने मामले को न केवल सूचना का अधिकार का उल्लंघन का पाया वरन भ्रष्टाचार और राजकीय धन हानि के साथ साथ मजदूरों के हितों के लिए लिया जाने वाला एक प्रतिशत सेस की राशि में भी गड़बड़ी का माना और माना कि इसी लिए चाही गई सूचनायें देनी संभव नहीं हो पा रही हैं।

मामले में  11 दिसंबर और फिर 16 फरवरी को अपीलार्थी को 15 दिनों के भीतर सही व सत्य सूचना उपलब्ध कराने के आदेश पारित किये गये थे, मगर 14 मई को हुई सुनवाई में भी उक्त आदेशों के अनुपालन में अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्यवाही की सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।

सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने एसडीएम सोहन सिंह सैनी, शालिनी मौर्य, चतर सिंह और संदीप कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि क्यों न सही सूचना उपलब्ध न कराये जाने पर उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु आदेशित किया जाय और उनपर रूपये 250 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 25 हजार रूपये की शास्ति आरोपित कर दी जाय। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

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