देहरादून। सूचना का अधिकार में सूचनार्थी मुजीब नैथानी की अयोग में की गई शिकायत से सामने आया कि वर्ष 2020 में कोटद्वार में रिवर टेनिंग के नाम पर हुए अवैध खनन मामले में उपजिलाधिकारी के स्तर से ही भ्रष्टाचार था, जिस वजह से उपजिलाधिकारी कार्यालय में तहसीलदार द्वारा उपलब्ध कराई गई खनन निरीक्षण आख्यायें धारित नहीं मिली और जो एक आख्या जिसमें तहसीलदार द्वारा अवैध खनन की पुष्टि की गई उस पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी कोटद्वार द्वारा संज्ञान तक नहीं लिया गया, साथ ही साथ सिंचाई विभाग द्वारा प्रेषित पत्र भी कार्यालय से गायब हो गये।
इस संबंध में सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर द्वारा पाया गया कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी योगेश सिंह मेहरा उक्त समय कोटद्वार में उपजिलाधिकारी के पद पर तैनात थे। वर्तमान उपजिलाधिकारी संदीप कुमार द्वारा तहसीलदार कोटद्वार की रिवर टेनिंग के संबंध में दी गईं आख्यायें उपलब्ध नहीं करवाई गईं और सिंचाई विभाग के पत्र भी कार्यालय में धारित नहीं बताये गए, जबकि सिंचाई विभाग द्वारा उक्त पत्र के उपजिलाधिकारी कोटद्वार कार्यालय द्वारा प्राप्ति सूचना उपलब्ध कराई गई थी।
इस पर आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर द्वारा उपजिलाधिकारी कोटद्वार संदीप कुमार पर 15 हजार रूपये की शास्ति लगाई गई जो दो किस्तों में देय होगी।
गौर मतलब है कि यह अवैध खनन का मामला तब का है जब सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गढ़वाल के पद पर तैनात थे।