ऋषिकेश। उत्तराखंड विकास पार्टी के उपाध्यक्ष पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड देश में अकेला ऐसा राज्य है जहाँ बहुसंख्यक सवर्ण समाज ठाकुर ब्राह्मण और वैश्य समाज की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद मूल निवास प्रमाणपत्र हटा दिया जाना इसका उदाहरण है।
उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भू सुधार कानून में परिवर्तन कर यहाँ की कृषि भूमि को बाज़ारू बना दिया गया, जिस वजह से मूल निवासी ही भूमि खरीद की दौड़ से ही बाहर हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस ब्लॉक की प्रति व्यक्ति आय 50 हजार रूपये महीना भी नहीं है, उस ब्लॉक में जमीनों की कीमतें दस लाख रूपये नाली से ऊपर चले गये हैं, जो पलायन को बढ़ावा दे रहे हैं, क्योंकि शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार के अभाव में लोग अपनी जमीनें बेच पलायन कर रहे हैं।
पूरण सिंह भंडारी ने यूजीसी आरक्षण और एससी एसटी एक्ट हटाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आरक्षण के बल पर भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता है। आरक्षण समाज में वर्ग भेद को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि आरक्षित समाज को वजीफे के साथ साथ आरक्षण का लाभ देना अनुचित है और यह संविधान में प्रदत्त समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस आरक्षण, यूजीसी और एससी एसटी एक्ट पर एक समान राय रखते हैं इसी लिये सवर्ण समाज को इस मामले में भाजपा कांग्रेस से ज्यादा उम्मीदें रखने की आवश्यकता नहीं है। इस कम के लिए स्वयं सवर्ण समाज को आगे आना होगा।