गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा, संस्कृति और समाज को मिल कर खत्म कर रहे हैं मोदी डबल इंजन और कांग्रेस, बचाने के लिये जागरूक होना जरूरी

ऋषिकेश। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। उत्तराखण्ड विकास पार्टी के उपाध्यक्ष पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि मोदी डबल ट्रिपल इंजन सरकार एक देश एक विधान के नाम पर गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा समाज संस्कृति को खत्म करना चाहती है, इसलिए गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं कर रही है।

पूरण सिंह भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा, संस्कृति और समाज के विकास और संवर्द्धन के खिलाफ हैं, इसलिए राज्य बनने के 25 साल बाद भी गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा, समाज और संस्कृति अपने ही राज्य में उपेक्षित है और मात्र वोट बैंक की खातिर बिना किसी मांग के और बिना वैधानिक हैसियत के नेपाली और पंजाबी को राज्य भाषा का दर्जा दे दिया गया है।

पूरण सिंह भंडारी ने कहा कि भाजपा कांग्रेस के इस षड्यंत्र को तोड़ने के लिए क्षेत्रीय शक्तियों को समर्थन देना ही होगा, नहीं तो गढ़वाली कुमाऊँनी कल इतिहास की बातें हो जायेंगी। उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास और संवर्द्धन के लिए हर महीने करोड़ों करोड़ रूपये खर्च होते हैं, तब जाकर हिंदी बची हुई है, मगर गढ़वाली कुमाऊँनी भाषा के विकास के लिए एक पाई भी खर्च न कर पाने वाली मोदी डबल ट्रिपल इंजन सरकार की बेरुखी के बावजूद गढ़वाली कुमाऊँनी अपना अस्तित्व बचा कर रखे हुए है, यह गढ़वाली कुमाऊँनी समाज की शक्ति का ही परिचायक है, मगर आखिर कब तक गढ़वाली कुमाऊँनी इस तरह अपने ही राज्य में उपेक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस लगातार गढ़वाली कुमाऊँनी भाषाओं के प्रति झूठी अफवाहें फैलते रहते हैं जबकि व्याकरण की दृष्टि में ये हिंदी से ज्यादा समृद्ध हैं और राज भाषायें रह चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में गढ़वाली कुमाऊँनी के अलावा हर कोई वोट बैंक है इसलिए उनकी बिना मांग के मांग पूरी हो रही हैं, और गढ़वाली कुमाऊँनी को कमतर बता कर गढ़वाली कुमाऊँनियों की मांगों को दबाया जा रहा है।

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