देहरादून। सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने नॉर्थ कॉर्बेट रिजॉर्ट में हुई चोरी की जाँच के संबंध में चाही गई सूचना पर दो उपजिलाधिकारी समेत प्रचार अधिकारी उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद देहरादून को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे पूछा है कि सूचना न दिए जाने के कारण क्यों न उनपर अधिकतम रूपये 25,000 की शास्ति अधिरोपित कर दी जाय और साथ साथ ही अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु उनके विभागाध्यक्ष को क्यों न संस्तुति कर दी जाय।
मामला कोटद्वार में नॉर्थ कॉर्बेट रिजॉर्ट कोटद्वार में हुई चोरी की जॉच के संबंध का था। सूचना का अधिकार के तहत उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने उपजिलाधिकारी कोटद्वार सोहन सिंह सैनी द्वारा नॉर्थ कॉर्बेट रिजॉर्ट में हुई चोरी की जांच पर दरवाजे, खिड़कियाँ, नल, पंखे, बिजली के तार, एमसीबी, स्विच बोर्ड, एयर कंडीशनर, गीजर आदि डीपीआर में कितने थे व कितने चोरी हुए के संबंध में सूचना चाही थी, जिस संबंध में उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी द्वारा उक्त सूचना पर्यटन विभाग को अंतरित कर दी। पर्यटन विभाग ने चोरी के संबंध में किसी भी प्रकार की सूचना होने से इनकार किया गया।

सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने बेशकीमती सरकारी सम्पत्ति के नुकसान पर अधिकारियों की लापरवाही को देखते हुए जिलाधिकारी गढ़वाल को प्रकरण की जाँच सीडीओ से कराने के आदेश दिये।
साथ ही मामले में प्रथम अपीलीय अधिकारी जो कि जिलाधिकारी होते हैं की बजाय अपर जिलाधिकारी के द्वारा प्रथम अपील की सुनवाई को नियम विरुद्ध माना और पूर्व में जिलाधिकारी गढ़वाल स्वाति भदौरिया को इस संबंध में स्वयं सुनवाई करने के आदेश दिये गये थे, उसका अनुपालन न होते देख सूचना आयुक्त ने राजस्व सचिव को सभी जिलों के जिलाधिकारियों को प्रथम अपील का निस्तारण स्वयं अपने स्तर से करने के निर्देश देने के आदेश भी किये ।
गौर मतलब है कि कई जिलों के जिलाधिकारी खुद को एक्ट से ऊपर मानते हुए प्रथम अपील की सुनवाई का भार अपर जिलाधिकारी के ऊपर डाल देते थे, जिस संबंध में पूर्व में सूचना आयोग द्वारा समय समय पर दिशा निर्देश भी जारी किये गये थे, मगर जिलाधिकारी इन निर्देशों का अनुपालन नहीं कर रहे थे।